कलम, आज उनकी जय बोल

रामधारी सिंह 'दिनकर' 11 Aug, 2026 19 बार पढ़ा गया


कलम, आज उनकी जय बोल - रामधारी सिंह 'दिनकर'

कवि: रामधारी सिंह 'दिनकर' (राष्ट्रकवि)

कवि परिचय: इनका जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के बेगूसराय में हुआ था। 'दिनकर' जी को हिंदी साहित्य में 'ओज का कवि' कहा जाता है। उनकी प्रसिद्ध कृति 'उर्वशी' के लिए उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ था।

कलम, आज उनकी जय बोल!

जला अस्थियाँ बारी-बारी,

छिटकाई जिसने चिंगारी,

जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर,

बिना लिए गर्दन का मोल। कलम, आज उनकी जय बोल!

जो अगणित लघु दीप हमारे,

तूफानों में एक किनारे,

जल-बुझ गये किसी उपकार पर,

बिना लिए कुछ मोल। कलम, आज उनकी जय बोल!

पीकर जिनकी लाल शिखाएँ,

उगल रही अब लपट दिशाएँ,

जिनके सिंहनाद से सहमी,

धरती रही अभी तक डोल। कलम, आज उनकी जय बोल!

कविता का भावार्थ:

राष्ट्रकवि दिनकर अपनी कलम को आदेश देते हैं कि वह उन वीर शहीदों की जय-जयकार करे, जिन्होंने मातृभूमि की स्वतंत्रता की वेदी पर बिना किसी स्वार्थ या नाम पाने की चाह के अपने प्राण न्योछावर कर दिए। वे उन अनगिनत गुमनाम शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं, जिनकी सिंहगर्जना से अत्याचारियों की नींव हिल गई थी।