कदम मिलाकर चलना होगा

अटल बिहारी वाजपेयी 11 Aug, 2026 5 बार पढ़ा गया


कदम मिलाकर चलना होगा - अटल बिहारी वाजपेयी

कवि: अटल बिहारी वाजपेयी

कवि परिचय: इनका जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ था। वे भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, ओजस्वी वक्ता और संवेदनशील कवि थे। उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से अलंकृत किया गया था।

बाधाएँ आती हैं आएँ,

घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,

पावों के नीचे अंगारे,

सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,

निज हाथों में हँसते-हँसते,

आग लगाकर जलना होगा।

कदम मिलाकर चलना होगा।

हास्य-रुदन में, तुफ़ानों में,

अगर असंख्यक बलिदानों में,

उद्यानों में, वीरानों में,

अपमानों में, सम्मानों में,

उन्नत मस्तक, उभरा सीना,

पीड़ाओं में पलना होगा।

कदम मिलाकर चलना होगा।

कविता का भावार्थ:

अटल जी इस कविता के माध्यम से देशवासियों को एकता और संघर्ष का संदेश देते हैं। वे कहते हैं कि राष्ट्र निर्माण के मार्ग में चाहे कितनी भी बाधाएँ, आपदाएँ, दुख या परेशानियाँ क्यों न आएँ, हमें अपनी हिम्मत हारने की ज़रूरत नहीं है। सभी को मतभेद भुलाकर, सम्मान-अपमान सहते हुए एक साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ना होगा।