ईदगाह कहानी का सारांश और मुख्य विचार (Idgah Story Summary)

मुंशी प्रेमचंद 05 Aug, 2026 5 बार पढ़ा गया

कहानी की शिक्षा (Moral of the Story): प्रेमचंद की यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा प्रेम और संवेदनशीलता उम्र की मोहताज नहीं होती। त्याग, समर्पण और दूसरों के प्रति निस्वार्थ भाव ही मनुष्य को महान बनाता है।

ईदगाह का सारांश:

'ईदगाह' मुंशी प्रेमचंद की कालजयी और संवेदनशील कहानियों में से एक है। यह कहानी चार-पांच साल के अनाथ बालक 'हामिद' के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी बूढ़ी दादी 'अमीना' के साथ रहता है। हामिद के माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है, फिर भी वह एक आशावादी और हंसमुख बच्चा है।

ईद के अवसर पर सभी बच्चे अपने माता-पिता के साथ मेले में जाते हैं। हामिद के पास केवल तीन पैसे हैं। मेले में अन्य बच्चे खिलौने, मिठाइयां और झूले का आनंद लेते हैं, लेकिन हामिद अपने पैसों को सोच-समझकर खर्च करना चाहता है।

जब वह मेले में लोहे की चीजों की दुकान पर पहुँचता है, तो उसे अपनी दादी का ध्यान आता है कि रोटी सेकते समय उनका हाथ चिमटा न होने के कारण जल जाता है। हामिद अपने लिए खिलौने या मिठाई न खरीदकर तीन पैसे में एक लोहे का चिमटा खरीद लेता है।

मुख्य पात्र (Character Sketch):

  • हामिद: एक समझदार, त्याग भावना से भरा और संवेदनशील बालक।

  • अमीना: हामिद की बूढ़ी और गरीब दादी, जो हामिद के प्रति अपार स्नेह रखती हैं।

जब हामिद घर लौटकर दादी को चिमटा देता है, तो पहले तो दादी गुस्सा होती हैं, लेकिन जब उन्हें हामिद के त्याग का अहसास होता है, तो उनकी आँखों में आंसू आ जाते हैं। यह कहानी बाल-मन और प्रौढ़-मन के अद्भुत भावनात्मक रिश्ते को दर्शाती है।