कलम, आज उनकी जय बोल
रामधारी सिंह 'दिनकर'
11 Aug, 2026
47 बार पढ़ा गया
कलम, आज उनकी जय बोल - रामधारी सिंह 'दिनकर'
कलम, आज उनकी जय बोल!
जला अस्थियाँ बारी-बारी,
छिटकाई जिसने चिंगारी,
जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर,
बिना लिए गर्दन का मोल। कलम, आज उनकी जय बोल!
जो अगणित लघु दीप हमारे,
तूफानों में एक किनारे,
जल-बुझ गये किसी उपकार पर,
बिना लिए कुछ मोल। कलम, आज उनकी जय बोल!
पीकर जिनकी लाल शिखाएँ,
उगल रही अब लपट दिशाएँ,
जिनके सिंहनाद से सहमी,
धरती रही अभी तक डोल। कलम, आज उनकी जय बोल!
कविता का भावार्थ:
राष्ट्रकवि दिनकर अपनी कलम को आदेश देते हैं कि वह उन वीर शहीदों की जय-जयकार करे, जिन्होंने मातृभूमि की स्वतंत्रता की वेदी पर बिना किसी स्वार्थ या नाम पाने की चाह के अपने प्राण न्योछावर कर दिए। वे उन अनगिनत गुमनाम शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं, जिनकी सिंहगर्जना से अत्याचारियों की नींव हिल गई थी।