केदारनाथ अग्रवाल की 'वह चिड़िया जो' - संपूर्ण कविता, भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर (NCERT Class 6 Hindi)

केदारनाथ अग्रवाल 05 Aug, 2026 10 बार पढ़ा गया

कविता का मुख्य संदेश:

यह कविता देशभक्ति, त्याग और मातृभूमि की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीरों के प्रति सम्मान की भावना जगाती है।

कविता:

चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ, चाह नहीं, प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ!

चाह नहीं, सम्राटों के शव पर हे हरि, डाला जाऊँ, चाह नहीं, देवों के सिर पर चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ!

मुझे तोड़ लेना बनमाली! उस पथ पर देना तुम फेंक, मातृभूमि पर शीश चढ़ाने जिस पथ जावें वीर अनेक!