नीला सियार

पंडित विष्णु शर्मा 11 Aug, 2026 8 बार पढ़ा गया
नीला सियार

3. नीला सियार (The Blue Jackal)

जंगल में नीला सियार

कहानी: चंदरक नाम का एक सियार भोजन की तलाश में भटकते हुए एक शहर में जा पहुँचा। वहाँ के पालतू कुत्तों ने उसे घेर लिया और भौंकते हुए उसके पीछे भागने लगे। अपनी जान बचाने के लिए सियार एक धोबी के घर में घुस गया और वहाँ रखे नीले रंग के एक बड़े ड्रम में कूद पड़ा।

जब कुत्ते चले गए, तो सियार बाहर निकला। वह पूरी तरह से नीले रंग में रंग चुका था। जब वह जंगल वापस लौटा, तो उसका अनोखा रूप देखकर जंगल के सभी पशु-पक्षी डर गए। चतुर सियार ने स्थिति का फायदा उठाया और घोषणा की, "भगवान ब्रह्मा ने मुझे स्वयं अपने हाथों से रंगा है और तुम्हें यह संदेश देने भेजा है कि आज से मैं तुम्हारा राजा हूँ।"

जंगल के सभी जानवरों ने उसे अपना राजा स्वीकार कर लिया और उसकी सेवा करने लगे। कुछ समय तक सब ठीक चला। लेकिन एक रात, जंगल में सियार का एक झुंड ज़ोर-ज़ोर से हुआँ-हुआँ (सियार की आवाज़) कर रहा था। अपनी प्राकृतिक आदत के कारण नीला सियार भी खुद को रोक न सका और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगा। उसकी आवाज़ सुनते ही जंगल के जानवर समझ गए कि वह कोई दिव्य प्राणी नहीं, बल्कि एक साधारण सियार है। सच्चाई सामने आते ही जानवरों ने मिलकर उसे जंगल से भगा दिया।

कहानी की सीख (Moral): बनावटी रूप या ढोंग लंबे समय तक नहीं छिपता। एक न एक दिन इंसान का असली स्वभाव और सच्चाई सबके सामने आ ही जाती है।