प्रेमचंद की 'नमक का दरोगा' - कहानी का सारांश एवं चरित्र चित्रण (NCERT Class 11 Hindi)
कहानी का मुख्य संदेश:
यह कहानी धर्म के सामने अधर्म के पराजय की गाथा है। ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के आगे अंततः धन और भ्रष्टाचार को भी झुकना पड़ता है।
पाठ का सारांश:
मुंशी वंशीधर को नमक विभाग में दरोगा का पद मिलता है। उनके पिता उन्हें ऊपरी कमाई (रिश्वत) पर ध्यान देने की सीख देते हैं, लेकिन वंशीधर एक कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार इंसान हैं। उस क्षेत्र के सबसे अमीर और प्रभावशाली जमींदार पंडित अलोपीदीन गैर-कानूनी तरीके से नमक की गाड़ियाँ निकाल रहे थे।
वंशीधर ने अलोपीदीन को गिरफ्तार कर लिया। अलोपीदीन ने बड़ी से बड़ी रिश्वत की पेशकश की, पर वंशीधर नहीं माने। अदालत में अपनी धन-शक्ति के बल पर अलोपीदीन छूट गए और वंशीधर को नौकरी से बर्खास्त करवा दिया। लेकिन बाद में अलोपीदीन को वंशीधर की ईमानदारी का अहसास हुआ और वे खुद उनके घर जाकर उन्हें अपनी पूरी जायदाद का स्थायी मैनेजर नियुक्त कर देते हैं।
मुख्य पात्र:
मुंशी वंशीधर: सत्यवादी, स्वाभिमानी और ईमानदार दरोगा।
पंडित अलोपीदीन: धनबल का अहंकार रखने वाले, परंतु अंत में सत्य का सम्मान करने वाले सेठ।