यह भारत देश हमारा है

सोहनलाल द्विवेदी 11 Aug, 2026 5 बार पढ़ा गया


यह भारत देश हमारा है - सोहनलाल द्विवेदी (विस्तृत वर्ज़न)

कवि: राष्ट्रकवि सोहनलाल द्विवेदी

कवि परिचय: राष्ट्रकवि सोहनलाल द्विवेदी (1906–1988) गांधीवादी विचारधारा और राष्ट्रीय चेतना के अमर कवि थे। उन्होंने बच्चों और युवाओं में देशभक्ति की ज्वाला जगाने के लिए कई अनमोल रचनाएँ लिखीं। भारत सरकार ने उन्हें 1969 में 'पद्म श्री' से अलंकृत किया था।

उँचा खड़ा हिमालय जिसका,

मुकुट मनोहर शीश सजा है,

गंगा-यमुना की धाराओं से,

पावन जिसका अंग रंगा है।

जिसकी मिट्टी सोना उगले,

जिसके कण-कण में उजियारा,

वह स्वतंत्र, निष्काम, निरंतर,

यह भारत देश हमारा है!

ऋषियों-मुनियों की यह जननी,

ज्ञान-दीप की अमरापुरी है,

जहाँ शांति का बजता डंका,

सत्य-अहिंसा की फहरी है।

सब धर्मों का संगम-स्थल,

सब जातियों का यह प्यारा,

विश्व शांति का दूत अनोखा,

यह भारत देश हमारा है!

विस्तृत भावार्थ व व्याख्या:

प्राकृतिक वैभव: कवि कहते हैं कि भारत का उत्तर दिशा में स्थित हिमालय पर्वत ऐसा प्रतीत होता है मानो भारत माता के मस्तक पर एक भव्य मुकुट सजा हो। गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियों का जल इस पावन धरा का अभिषेक करता है। यहाँ की उर्वर मिट्टी सोना (भरपूर अनाज) उपजाती है।

सांस्कृतिक व आध्यात्मिक महत्ता: यह देश केवल भौगोलिक रूप से समृद्ध नहीं है, बल्कि यह ऋषियों, मुनियों और ज्ञान का केंद्र रहा है। भारत ने ही पूरी दुनिया को शांति, सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया है। विविधता में एकता का प्रतीक यह देश पूरे संसार में शांति का संदेशवाहक है।