शेर और चतुर खरगोश
1. शेर और चतुर खरगोश (The Lion and the Clever Rabbit)
विस्तृत कहानी: एक घना और विशाल जंगल था। उस जंगल में 'भासुरक' नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली और क्रूर शेर राज करता था। वह केवल अपनी भूख मिटाने के लिए शिकार नहीं करता था, बल्कि अपने अहंकार और बल के घमंड में रोज़ दर्जनों बेकसूर जानवरों का शिकार कर उन्हें मौत के घाट उतार देता था। शेर के इस अत्याचार से पूरा जंगल थर-थर कांपता था। हिरण, खरगोश, नीलगाय और जंगली सूअर हमेशा भय के साए में जीते थे।
जंगल में रोज-रोज मचते इस कत्लेआम को रोकने के लिए एक दिन जंगल के सभी बड़े जानवरों ने मिलकर एक सभा बुलाई। काफी सोच-विचार के बाद वे सब डरते-डरते राजा भासुरक की गुफा के पास पहुँचे। शेर ने गरजते हुए पूछा, "तुम सब यहाँ एक साथ क्यों आए हो? क्या मौत बुला रही है तुम सबको?"
जानवरों के मुखिया ने हाथ जोड़कर कहा, "महाराज! आप हमारे राजा हैं और हम आपकी प्रजा। यदि आप इसी तरह रोज़ दर्जनों जानवरों को मारते रहेंगे, तो बहुत जल्द यह जंगल पूरी तरह वीरान हो जाएगा। फिर न तो कोई प्रजा बचेगी और न ही आपको भोजन मिलेगा। इसलिए हम एक प्रस्ताव लेकर आए हैं। आज से आपको शिकार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। हम रोज़ अपनी इच्छा से बारी-बारी से एक जानवर आपकी गुफा में भोजन के रूप में भेज दिया करेंगे।"
भासुरक ने थोड़ी देर सोचा और शर्त रखते हुए कहा, "ठीक है, मुझे तुम्हारा प्रस्ताव मंज़ूर है। लेकिन ध्यान रखना, जिस दिन मुझे समय पर भोजन नहीं मिला या कोई जानवर नहीं आया, उस दिन मैं पूरे जंगल का विनाश कर दूंगा।"
उस दिन के बाद से रोज़ एक जानवर की बारी तय की जाती और वह शेर की गुफा में चला जाता। कुछ हफ़्तों बाद एक छोटे से खरगोश की बारी आई। खरगोश शरीर से भले ही छोटा और कमज़ोर था, लेकिन वह बेहद बुद्धिमान और चतुर था। वह अपनी जान यूँ मुफ़्त में नहीं गँवाना चाहता था। उसने सोचा, "मरना तो तय ही है, फिर क्यों न अपनी बुद्धि का प्रयोग करके इस ज़ालिम शेर से पूरे जंगल को मुक्ति दिलाने का प्रयास किया जाए?"
खरगोश ने अपनी योजना बनाई और जानबूझकर गुफा की ओर बहुत धीमी गति से चलना शुरू किया। रास्ते में वह आराम करता हुआ, छाँव में सोता हुआ बहुत देर से शेर की गुफा के पास पहुँचा। तब तक सूरज ढल चुका था और भूखा शेर गुस्से से पागल हो रहा था। वह मन ही मन सोच रहा था कि आज रात को पूरे जंगल को तहस-नहस कर देगा।
जैसे ही छोटा खरगोश गुफा के सामने पहुँचा, शेर ज़ोर से दहाड़ा, "नादान जीव! एक तो तू इतना छोटा है कि तुझे खाकर मेरी ज़रा सी भूख भी नहीं मिटेगी, ऊपर से तू इतनी देर से आया है! बता, तुझे मारकर खाने के बाद मैं बाकी जानवरों को कैसे खत्म करूँ?"
खरगोश ने बिना डरे बहुत ही विनम्रता और दुखी आवाज़ में कहा, "महाराज! इसमें न तो मेरी गलती है और न ही जंगल के अन्य जानवरों की। आप चाहें तो मुझे मार दें, लेकिन सच सुन लीजिए। जंगल के जानवरों ने मुझे मिलाकर पाँच खरगोश आपके भोजन के लिए भेजे थे ताकि आपका पेट भर सके। लेकिन रास्ते में हमें एक दूसरा विशालकाय शेर मिल गया। उसने हम सबको रोक लिया और कहा कि यह जंगल उसका है और वही यहाँ का असली राजा है।"
भासुरक का खून खौल उठा। उसने दहाड़ते हुए कहा, "क्या? दूसरा शेर? इस जंगल में मेरे अलावा दूसरा राजा कौन पैदा हो गया?"
खरगोश ने आगे कहा, "महाराज, जब हमने उससे कहा कि हमारे राजा भासुरक हैं, तो उसने कहा कि भासुरक एक कायर है। अगर उसमें हिम्मत है तो आकर मुझसे लड़े। उसने मेरे चार साथियों को अपने पास बंदी बना लिया और मुझे आपके पास यह संदेश देने के लिए भेजा है।"
अहंकार में अंधे हो चुके भासुरक ने खरगोश से कहा, "मुझे अभी उस दुष्ट के पास ले चल! आज मैं उसका सीना चीरकर ही दम लूँगा।"
चतुर खरगोश शेर को राह दिखाते हुए जंगल के एक पुराने और बहुत गहरे कुएँ के पास ले गया। खरगोश ने कुएँ की ओर इशारा करते हुए कहा, "महाराज! वह दुष्ट शेर इसी पानी के किले के अंदर छिपा बैठा है। जब मैं आया था तो वह यहीं से दहाड़ रहा था।"
भासुरक ने गुस्से में आकर कुएँ की दीवार पर अपने पंजे रखे और अंदर झाँका। कुएँ के शांत पानी में उसे अपनी ही परछाईं दिखाई दी। कुएँ की गहराई के कारण उसे लगा कि सचमुच नीचे दूसरा शेर छिपा है। भासुरक ने उसे डराने के लिए ज़ोर से दहाड़ मारी। कुएँ की दीवारों से टकराकर वही दहाड़ दोगुनी आवाज़ के साथ वापस गूँजी (प्रतिध्वनि)।
शेर को लगा कि नीचे बैठा दूसरा शेर उसे ललकार रहा है। बिना एक पल सोचे, गुस्से में अंधा होकर भासुरक उस दूसरे शेर पर हमला करने के लिए कुएँ के गहरे पानी में कूद पड़ा। कुआँ बहुत गहरा था और उसकी दीवारें सीधी थीं। शेर तैरने की कोशिश करता रहा, लेकिन बाहर न निकल सका और तड़प-तड़पकर पानी में डूबकर मर गया।
चतुर खरगोश खुशी-खुशी जंगल में वापस लौटा और सभी जानवरों को शेर के अंत की खुशखबरी सुनाई। पूरे जंगल में जश्न का माहौल छा गया और सभी ने खरगोश की बुद्धिमत्ता की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
कहानी की सीख (Moral): बुद्धियों यस्य बलं तस्य (जिसके पास बुद्धि है, उसी के पास वास्तविक बल है)। शारीरिक ताकत से बड़ी बुद्धिबल होती है। कठिन से कठिन परिस्थिति में भी यदि धैर्य और संयम से बुद्धि का प्रयोग किया जाए, तो बड़े से बड़े संकट और शक्तिशाली शत्रु को भी परास्त किया जा सकता है।