गोदान का सारांश और पात्र परिचय (Godan Character Analysis & Summary)

मुंशी प्रेमचंद 05 Aug, 2026 4 बार पढ़ा गया

पाठ का उद्देश्य (NCERT Class 11-12 Hindi Syllabus): मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास 'गोदान' भारतीय कृषक समाज के दर्द, शोषण, महाजनी सभ्यता और गरीबी की यथार्थवादी तस्वीर पेश करता है।

गोदान का मुख्य सारांश:

'गोदान' (1936) प्रेमचंद का अंतिम और सबसे महत्त्वपूर्ण उपन्यास है। यह ग्रामीण भारत के एक गरीब किसान होरी के जीवन की महागाथा है। होरी की सबसे बड़ी इच्छा एक गाय खरीदने की होती है, ताकि वह अपने परिवार का पोषण कर सके और धार्मिक मान्यता के अनुसार अपने जीवन के अंत में 'गोदान' कर सके।

होरी किसी तरह कर्ज लेकर गाय लाता है, लेकिन पारिवारिक ईर्ष्या के कारण उसका भाई ही गाय को जहर देकर मार देता है। इसके बाद होरी पर महाजनों का कर्ज बढ़ता जाता है। वह जीवन भर कड़ी मेहनत करता है, लेकिन शोषण और जमींदारी प्रथा के चक्रव्यूह से बाहर नहीं निकल पाता। अंत में, अत्यधिक परिश्रम और कुपोषण के कारण उसकी मृत्यु हो जाती है।

मुख्य पात्र परिचय (Character Analysis):

  1. होरी (मुख्य पात्र): बेलारी गाँव का एक सीधा-साधा, मेहनती और धर्म भीरू किसान। वह शोषण सहता है, लेकिन अपनी नैतिकता नहीं छोड़ता।

  2. धनिया (होरी की पत्नी): एक स्वाभिमानी, निडर और व्यवहारिक महिला। वह महाजनों और अन्याय के खिलाफ खुलकर आवाज उठाती है।

  3. गोबर (होरी का बेटा): नई पीढ़ी का प्रतीक, जो पुरानी व्यवस्था और शोषण को चुपचाप स्वीकार करने के बजाय विद्रोह करता है और शहर चला जाता है।

  4. राय साहब: गाँव के जमींदार, जो शोषक वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं।